2014 से बढ़कर BJP को 2019 में 50% वोट शेयर वाली मिलीं 224 सीटें, पर विपक्ष को दिख रही उम्मीद की किरण

नई दिल्ली: दिप्रिंट के एक विश्लेषण से पता चलता है कि यदि गैर-भाजपा उम्मीदवारों, निर्दलीय उम्मीदवारों और नोटा के सभी वोटों को एक साथ जोड़ भी दिया जाता, तो भी भाजपा 2019 में 224 सीटें जीतती जो कि बहुमत के आंकड़े से केवल 48 सीटें कम होती.

जिन 436 निर्वाचन क्षेत्रों में वह मैदान में थी, उनमें से आधे से अधिक में भाजपा ने 50 प्रतिशत से अधिक वोट शेयर हासिल किया. वास्तव में, इस विशाल वोट शेयर से भाजपा ने जो 224 सीटें जीतीं, वह 1984 के बाद से किसी भी एक पार्टी के लिए सबसे अधिक है.

विशेष रूप से, 2014 के लोकसभा चुनावों में केवल 136 भाजपा सांसदों ने 50 प्रतिशत या उससे अधिक वोट शेयर हासिल किया था. पार्टी ने इस वोट शेयर के साथ न केवल अपनी सीटों की संख्या में बढ़ोतरी की है, बल्कि व्यापक भौगोलिक विस्तार में ऐसी जीत भी दर्ज की है.

क्रेडिटः रमनदीप कौर । दिप्रिंट टीम

इसलिए, जो लोग 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा से मुकाबला करने के लिए एक विशाल गठबंधन की कल्पना कर रहे हैं, उनके लिए चुनौती ज़बरदस्त लगती है. हालांकि, विपक्षी दलों के सदस्यों – जिनमें से 15 ने संयुक्त रणनीति बनाने के लिए शुक्रवार को पटना में बैठक की -उनका दावा है कि ऐसी संख्याएं पूरी कहानी नहीं बताती हैं.

दिप्रिंट से बात करने वाले राजनीतिक विश्लेषकों ने भी यही राय रखी.

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